मित्रता दिवस पर एक कविता // मित्रता

रिश्ता ये है सबसे न्यारा 
कभी अपनापन कभी सहारा 
सुख दुख को यूं बांट लेते 
उदास लबों पर मुस्कान देते 

दोस्ती, यारी, मित्रता सारी 
निभाते दोस्त बारी-बारी 
किशन सुदामा की वो मैत्री
विश्वास, नेह भरी थी प्रीति 

धूप छांव में साथ निभाये 
वही सच्चा मित्र कहलाये 
प्रेम विश्वास से रख यारी 
मित्रता में ना करो गद्दारी 

मित्र महकाये जीवन क्यारी 
दूर करते चिंता दुश्वारी 
ऐसे चंचल से विचित्र है 
वो ही तो सच्चे मित्र हैं 

मित्र वही जो इक संबल बने 
आस, शक्ति संग प्रबल बने 
एक विश्वास समर्पण हो 
पथ प्रदर्शक एक दर्पण हो 

द्वेष ,कपट, ईर्ष्या ,बुराई 
ना रहे भावना पराई 
तूफानों में हो संग खड़ा 
उसी मित्र का स्थान बड़ा 

न जाति ना धर्म की भाषा 
मित्रता की यही परिभाषा  
अंधियारो में राह दिखलाये 
दीप सा बन पथ दमकाये

कृष्ण अर्जुन मित्रता निभाई 
मोह त्याग कर्म राह दिखाई 
मित्रता को आधार बनाया 
एक नया सा पथ दिखलाया

नेह, सम्मान जागृत करें
रिश्ते सँवार आकृत करें 
सच्चा मित्र वही कहलाये 
शक्ति ,विश्वास बन राह दिखाये ।