रक्षाबंधन पर एक सुंदर कविता // रक्षाबंधन 

कलाई सजा ये सुंदर धागा 
धागा   नहीं, प्रेम की डोरी
बचपन  की   हँसी लड़ाई
रुठना मनाना माँ की लोरी

वो   तेरा   छुपकर    मनाना
गुड़िया, टॉफ़ी खिलौने लाना
माँ की डांट से कभी बचाना
छुपकर  मिठाई खा जाना

राखी बाँधूं  आँख भर आती 
दूर   सही ,     यादें   बुलाती 
बस  इतना वादा  निभा देना
प्रीत   न  मेरी  भूला  देना

चला आना  डोरी बंधाने 
बहन को तू  कभी सताने
नेह   भरी  ये   प्रेम पाती
यादें तेरी कितना रुलाती

सलामत  रहे तू यूँ सदा
बना रहे प्रेम, स्नेह सदा
रिश्ता ये अटूट बन जाये 
आ हम  रक्षाबंधन मनाये 

चुन लाई रंग बिरंगी राखी 
सतरंगी वो सितारो वाली 
याद आ रहा मायका मेरा
मैया वो घर आँगन तेरा

छोड़  आई थी गलियारे 
थे जब  से  मैंने पग फेरे
थाल सजा चली लाऊँगी 
भाई तेरा घर देख आऊँगी 

कुछ ना वहाँ बदला होगा 
छोटी सी जगह मेरी होगी
ना  माँगती    सोना चाँदी 
प्रेम   भरी   माँ तेरी गोदी

रिश्ता यूँ ही बना रहे सदा
ना बिखरे  यूँ माला मोती
छूटे ना कभी अँगना तेरा 
भाई बहिन की प्रेम पाती।