रायबरेली की माटी में जन्मे
ज्ञान के दीप बनकर चमके
हिंदी साहित्य के थे ज्ञाता
सरस्वती पत्रिका के निर्माता
युग को थे राह दिखलाये
महावीर युग निर्माता कहायेे
बोलते लिखते खड़ी बोली
ब्रज भाषा संग हमजोली
अनेक कलमों को राह दिखाते
अन्तस एक चेतना जगाते
मैथिली शरण गुप्त के वे
पथ प्रदर्शक गुरु कहाये
हिंदी पर विशेष प्रेम दिखाते
हिंदी पर सम्मान दिखलाते
हिंदी भाषा लगती अपनी
हिंदी को बतलाते जननी
युग प्रवर्तक,युग विधाता
द्विवेदी युग अधिष्ठाता
हिंदी परचम लहरायेगी
महावीर याद दिलायेगी।
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