नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर पर कविता// गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर 

जनगणमन के थे रचियता 
गाँधीजी को कहते पिता
देश को राष्ट्र गान दिया
एकता, सद्भाव का नाम किया

देशभक्ति की मशाल जलाई 
देशप्रेम की राह दिखलाई
जलियावाला के विरोध में
नाइट हुड की उपाधि लौटाई।

शांतिनिकेतन की छाया में,
एक दीपक आज भी जलता 
जिसकी लौ में गीतांजलि है,
जिसमें भारत का मन बसता 

देशप्रेम की प्रबल भावना 
तब थे गुरुदेव कहलाये 
कवि हृदय ने लेखनी से
स्वर लहरी से गीत बनाये 

बंगाल की माटी के सपूत थे
भारत के तुम वीर कहलाये 
लेखनी को उन्नत बना यूं 
नोबल पुरस्कार को थे पाये

था जहाँ जन-गण-मन गूँजा
वहाँ तुम्हारा उन्नत स्वर उठा
भारतवर्ष के सम्मान में 
गुरु मान शीश झुक जाता

गुरुदेव तुम प्रकाश-पुंज से 
कविता नहीं, स्वयं इक युग हो
जनजन के हृदय में बस यूं 
हर शब्द में,हर धुन में अमर हो।