भाग्य और कर्म का महत्व बतलाती एक शानदार कविता//भाग्य/मुक़द्दर 
कर्म कर आगे बढ़ 
हार से कभी ना डर 
मंजिल की आस कर
मुकद्दर तू तलाश कर 

कर्म को प्रधान कर 
कर्तव्य भाव जानकर 
भीतर एक रख आग
तब तो बने भाग 

कर्तव्य की है रेल 
भाग्य का नहीं खेल 
चल तू डगर डगर 
पूरा कर तू सफर 

पी ले मेहनत का जाम
भाग्य करे तुझे सलाम
हार से ले तू जीत
कर्म से लगा ले प्रीत

नदी चलती लड़कर
पर्वत खड़े अड़ कर 
जा मिलती वो सागर 
विश्वास से उजागर 

कर्म से भाग्य सींच
पहिये की गाड़ी खींच
कर्म भाग्य नहीं पृथक
परिश्रम कर तू अथक

परिश्रम से लिख कल
कर्म से मिलेगा फल 
भाग्य को ना लगे जंग
चमकेगा नया रंग।