मोहिनी एकादशी पर कविता// मोहिनी एकादशी 

वैशाख शुक्ल एकादशी आई
मोहिनी एकादशी कहाई
समुद्र मंथन जब पूर्ण हुआ
अमृत कलश की बारी आई

देव-दानव में युद्ध छिड़ा
अमृत पर सबका हक भारी
तब नारायण ने रूप धरा
मोहिनी बन इक सुंदर-न्यारी

सोलह श्रृंगार मोहिनी आई 
रूप देख दैत्य दृष्टि ललचाई 
दानव सब मोहित हो बैठे
सुध-बुध थी सबकी बिसराई

हाथों ले अमृत कलश सारा 
न्याय का था पाठ पढ़ाया
देवों को अमृत पान कराया 
सत्य,धर्म को जीवंत बनाया

व्रत करते जो नर नारी
मोह-माया से मुक्ति पाते
नारायण कृपा से जीवन में 
सुख-समृद्धि वैभव पाते

अन्न-जल को त्याग करके
हरि नाम का सब जाप करें
भूख-प्यास, व्रत तपस्या से 
मनुज के पापों का नाश करें।

मोहिनी व्रत ये सिखलाता 
छल से मनुज कुछ ना पाता
माया छल की राह पर चलके
जीवन अमृत भी खो जाता।