अक्षय तृतीया के अवसर पर एक कविता हिंदी में// अक्षय तृतीया
वैशाख मास, शुक्ल तृतीया,
आई शुभ अक्षय तृतीया
जिस दिन पुण्य कभी क्षय न होता,
सौभाग्य कलश छलकता जाता।
आज के दिन त्रेता में जन्मे,
विष्णु अवतार वे परशुराम थे
गंगा स्वर्ग। से धरा उतरी,
पावन मोक्षदायिनी ठहरी
व्यास ऋषि ने बैठकर,यूं ही
महाभारत लिखना आरंभ किया
गणेश जी ने कलम उठाई,
ज्ञान का अक्षय भंडार दिया।
सुदामा की धान पोटली ने,
द्वारिका वैभव पाया था
द्रौपदी थाल अक्षय हुई,
कृष्ण ने मान बढ़ाया था
दान पुण्य आज अक्षय होता
महत्व इसका कभी ना घटता
सोना-चांदी, अन्न-वस्त्र लाते
श्रद्धा,आस से भंडार सजाते
किसान हल की पूजा करे,
व्यापारी बही-खाता खोले।
नव-वधू घर में पग फेरे,
घर आंगन में मंगल बेले।
अक्षय रहे पूजन ,संस्कृति ये
अक्षय रहे धर्म, ज्ञान सारा
अक्षय रहे प्रेम ,करुणा,
अक्षय रहे रवि की अरुणा
आओ इस अक्षय तृतीया
अहंकार, ईर्ष्या का त्याग करें
दया, धर्म का बीज मन में,
बो पुण्य मनुजता अक्षय करें।
.jpg)
0 Comments
Post a Comment