***मैंने न देखा***
दूर कहीं शामियाना सजा
चमक उठा तब गगन सारा
दूर फिर भी था गगन कितना
चमकता सूरज मैंनें न देखा
धरा पर भी सुंदर नजारे
नयनों को लगते थे प्यारे
नजरो का है भ्रम कितना
बदलता पहर मैने न देखा
पुष्प पल्लवित सुवासित सारे
उपवन में आई बहारे
निर्जन वन था चमन कैसा
सुंदर चमन मैंने न देखा
नेह अनुराग जीवन भरा
छलके कलश यूं प्रेम भरा
नेह विहीन सा क्षण बीता
प्रेम अनुनयन मैंने न देखा
खिलखिलाती जीवन फुलवारी
भूले जीवन की दुश्वारी
कुछ थमती सी जीवन सरिता
खिलता जीवन मैंने न देखा।
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