प्रेम को समर्पित एक सुंदर कविता// मैंने न देखा 

***मैंने न देखा***


दूर कहीं शामियाना सजा 
चमक उठा तब गगन सारा 
दूर फिर भी था गगन कितना
चमकता सूरज मैंनें न देखा 

धरा पर भी सुंदर नजारे 
नयनों को लगते थे प्यारे 
नजरो का है भ्रम कितना 
बदलता पहर मैने न देखा

पुष्प पल्लवित सुवासित सारे
उपवन में आई बहारे 
निर्जन वन था चमन कैसा
सुंदर चमन मैंने न देखा 

नेह अनुराग जीवन भरा
छलके कलश यूं प्रेम भरा
नेह विहीन सा क्षण बीता
प्रेम अनुनयन मैंने न देखा

खिलखिलाती जीवन फुलवारी 
भूले जीवन की दुश्वारी 
कुछ थमती सी जीवन सरिता
खिलता जीवन मैंने न देखा।