महिला दिवस पर एक सुंदर कविता हिंदी में // नारी
नारी तुम हो जीवन सारा
बहती नदिया का किनारा
तुम सृजना तुम सृष्टा भी
नवजीवन तुम स्रष्टा भी
पुष्प सी एक कोमल करावली
तिमिर दूर करती विभावरी
प्रेम वात्सल्य से यूं हिय भरा
धैर्य, साहस है हृदय धरा
जग,संसार की जीवनदायिनी
सुंदर पावन सतत प्रवाहिनी
घर परिवार रक्षक ललना
सृजित संवरता घर अंगना
कभी आंगन में सजी तुलसी
कभी महकती मधु कामिनी सी
लघु से आंचल संसार समेटे
दायित्व निभा बरबस बैठे
गृह,जगत समरूप बनाये
चित्रित इक संसार सजाये
कभी कोमल कहीं विदूषी
वीरांगना तेजस्वी मानुषी
जीवनधारा संग पतवार हो
नारी तुम जीवन आधार हो
सुवासित बगिया कचनार सी
कभी तीक्ष्ण, तीव्र तलवार सी
नारी का हर स्वरूप निराला
प्रखर भानू सबसे आला
हर युग में जीवन बनाये
तभी नारी सृष्टा कहलाये।
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