शीतलता ले आई शीतला
शीत ,ठंडा भोजन बनायें
हलवा पूड़ी ठंडाई से
शीतला माँ को भोग लगायें
ताप,अग्नि जो कोई जलाये
शीतला माँ कुपित हो जाये
ठंडा, शांत भोजन बनाये
बासी अन्न ही माँ को भाये
चेचक ज्वर फोड़े व्याधियाँ
सारे कष्ट दूर करें शीतला
रात्रि मीठे पकवान बनायें
ठंडा ही तो माँ को भाये
रोग पीड़ा से दुख पाये
तेरी ही शरण में आये
शांत, शीतल करती तू ही
सारे जग की जननी तू ही
रात, सिंहासन शोभित होवे
रूप माता का सदा सुहावे
स्वास्थ्य, संपत्ति सुख पाता
तन, मन से जो कोई ध्याता
ठंडा, शीतल भोजन बनाये
शीतला माँ को भोग लगावे
विधान से जो कोई पूजे
सुख, शांति, आशीर्वाद पाये।
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