प्रेम को दर्शाती एक सुंदर कविता//राजकुमार
सघन तरुवर शीतल छायादो दिल मिले मुख मुस्काया
नयन देखते स्वप्न सुनहरे
कोमल कलियाँ फिरते भंवरे
हाथी,घोड़े संग वो लाया
सुंदर मुखड़ा भी शरमाया
नीलगगन तारा टिमटिमाया
क्या राजकुमार वापस आया?
चंचल उमंगें बनी सतरंगी
रम्य, अधर पे सजती रसवंती
चाँद,तारे थे ज़मीं उतरे
गगन के यूँ आंगन न ठहरे
सज रहा सुंदर संसार सुहाना
छलकता सा इक पैमाना
मेंहदी की सुगंध बिखराई
रच आई कोमल करावली
मंद पवन का झोंका आया
जिसने आँचल को उड़ाया
तकते रहे नयन पथ सारे
क्या राजकुमार वापस आया?
पात पात बिखर गये सारे
नयनों से विह्वल हुये नज़ारे
चंद्रवदनी सा मुख कुम्भलाया
क्या राजकुमार वापस आया?
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