सात फेरों पर एक सुंदर कविता// अग्नि के सात फेरे
रिश्तो को कर देता गहरा
सर पर चुनर माथे सेहरा
आंचल में बँधे सपने मेरे
हुये जब अग्नि के सात फेरे
सात फेरों से संसार सजा
परिणीता का श्रृंगार नया
देखें नित वो स्वप्न सुनहरे
नयन है स्याह पयोद घनेरे
सात फेरों का बंधन अनोखा
देते कुछ दिल फिर भी धोखा
हर कोई ना मान रखता
वचनों का ना भान रखता
प्रथम प्रेम,मान वचन होता
दूजा संग अटूट जीवन होता
हर सुख दुख में हो सहभागी
संग चलना बनके अनुरागी
सातवां फेरा समर्पण का
प्रेम सद्भाव ले संग चलना
विश्वास,निष्ठा अटूट बंधन का
रस्म,रिवाज का पालन करना
साथ निभाने का वचन वादा
बदल जाता जब इरादा
प्रेम नेह सब छूट जाता
धोखा जब हृदय समाता
अग्नि के साथ फेरे ही तो
आस विश्वास है ये जन्मो का
संग है जीवन मृत्यु तक का
साथ रस्मों कसमों वादों का
सात फेरों की वो घड़ियाँ
अनमोल जैसे मोती लड़ियाँ
कभी ना इसे तुम बिखराना
सात फेरों की कसम निभाना।
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