*"विश्व बाल श्रम निषेध दिवस*

मासूम हाथ आई कुल्हाड़ी
कैसी ये मजबूरी लाचारी 
गुड्डे,गुड्डी खिलौने छूटे 
हजारों थे वो सपने टूटे

जीवन बीते जैसे परीक्षा
ना पुस्तक ना शिक्षा दीक्षा 
मजदूरी में जीवन बीतता
समय का पहिया कब रुकता 

बचपन को सहेजना होगा
बाल श्रम रोकना होगा
उठायें सब जिम्मेदारी 
मिले खुशियाँ बारी बारी

मासूम बचपन बचाना है
इक नईं राह बनाना है
बाल श्रम निषेध होगा
हर बालक विशेष होगा