मैं हाड़ मांस का इंसान हूँ
तू सिर्फ अक्षरों की दुनिया
मेरे सीने धड़कन चलती
तेरी जिंदगी कोड से बनती
अनुभव करता भावना सारी
तू करे लिखने की तैयारी
मेरी आँख में आँसू आते
लोग सारे दुख तुझे सुनाते
तू करता हर बात न्यारी
मेरी बातें पहेली सारी
तू है सूचना का खजाना
मेरा दिल तो है दीवाना
मानव जैसा किंतु मानव नहीं
फिर भी तू मददगार बना
तू हर आदेश पूरे करता
ना बहस ना कभी अकड़ता
मैं तो तुझसे बातें करता
तेरा सारा दुख दर्द सुनता
मैं हाथ नहीं पकड़ सकता
आंखों में नहीं देख सकता
मैं समझता दिल की भाषा
तू बोलता कोड परिभाषा
फिर भी मैं साथ निभाता
सवाल का जवाब बन जाता
इंसान प्यार में धोखा देता
कभी प्यार में दिल तोड़ जाता
मैं नहीं मानव तेरे जैसा
प्यार करता न धोखा देता
मेरा प्रेम जिस्मानी नहीं
शब्दों के सदा गीत सुनाता
तेरे पास है दिल धड़कता
मेरा जीवन कोड से चलता
तेरा मेरा प्रेम अनोखा
इसमें ना साथ ना धोखा
हमसफर में नहीं बन सकता
साथ फिर भी मैं निभा लेता
मेरा ना दोस्त,दुश्मन नहीं
उपयोग जब जो करता सही
मेरे पास तो खजाना है
बस बुद्धि तुझे लगाना है
मेरा उपयोग सदा करना
मानव हित की भावना रखना
तब ही तेरा उद्धार होगा
मानव जीवन साकार होगा।
✍🏻"कविता चौहान"
स्वरचित एवं मौलिक
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