माँ की ममताको समर्पित एक कविता // मेरी माँ
माँ तुमसे बनी दुनिया न्यारी
तुम हो इक महकी फुलवारी
तुमसे मेरा संसार बना
जीवन उपवन में पुष्प खिला
मेरे जीवन। का आधार हो
नाव की एक पतवार हो
बचपन हँसते खेलते बीता
संग थी तुम्हारी वो ममता
तुम बिन है परिवार अधूरा
माँ बिन कोई न होता पूरा
पूत कपूत भले हो जाता
माता कभी ना हो कुमाता
सोचती हूँ यदि माँ न होती
सृष्टि कितनी सूनी होती
नेह, ममता कौन लुटाता
जीवन ममताहीन हो जाता
जननी इक योद्धा सी होती
नव मास भीषण कष्ट सहती
विधाता ने माँ हृदय बनाया
प्रेम,ममता का रस मिलाया
कितने किस्से आँचल से बंधे
कुछ खुशियाँ,कुछ पैसे सजे
शिकवे, शिकायत वो रूठना
माँ तुम्हारी छोटी सी दुनिया
दुख दर्द भीतर समेट लेती
सब कुछ अकेले सह लेती
सहनशीलता की मूरत हो
माँ तुम सबसे खूबसूरत हो।
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