नदी पर एक कविता हिन्दी में नदी झर झर बहती पुण्य सलीला समेट खुद में असंख्य लीला मोक्ष देती मोक…
Read more
Showing posts from January, 2026Show all
नदी पर एक कविता हिन्दी में नदी झर झर बहती पुण्य सलीला समेट खुद में असंख्य लीला मोक्ष देती मोक…
Read moreएक दर्द भरी कविता// कुछ प्रेम निशी थी वो बड़ी सुहानी मौसम की वो बड़ी मनमानी मिले जब दो दिल दीवाने गाते गुनगुनाते कुछ तराने वो गल…
Read moreप्रभु श्री राम पर एक कविता।। दिल में बसे सियाराम दिल में बसे सियाराम चरणों में जिनके शीश झुके वही तो करुणा के धाम हैं मन दर्पण …
Read more