हे नारी तुम अब कठोर बन जाना हे नारी तुम अब कठोर बन जाना रूप एक नया सबको दिखलाना कोमल काया से शीला सी जड़ हो जाना।। त्याग ममता प्यार की मूरत हो तुम…
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खुद को फिर से बनाना खुद को फिर से बनाना बिखर गया जो कतरा कतरा उसको चुन लाना तोड़ दिया जो टुकड़े करके उस दिल को फिर जोड़ जाना बचपन मे ज…
Read moreमासूम कली फिर से एक मासूम कली मसलाई होगी किस ने ये सजा दिलाई होगी अनजान सी जा रही होगी उसकी राह किसीने रोक ली होगी बेशर्मी से फिर …
Read moreससुराल मे दर्द सहती बेटी की कविता // एक मरी हुई बेटी// एक मरी हुई बेटी से तलाक़शुदा ज्यादा अच्छी है। एक रोती हुई विवाहिता से अकेली बैठी ज्यादा अच…
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